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सुधा बीज बोने से पहिले, काल- कूट पीना होगा।
पहिन मौत का मुकुट, विश्व- हित मानव को जीना होगा ॥


पिछले दिनों भौतिक विज्ञान व बुद्धिवाद का जो विकास हुआ है ।। उसने मानव जाति के हर पहलू को भले या बुरे रूप में प्रभावित किया है ।। लाभ यह हुआ कि वैज्ञानिक आविष्कारों से हमें बहुत सुविधा- साधन मिले और हानि यह हुई कि विज्ञान के प्रत्यक्षवादी दर्शन से प्रभावित बुद्धि ने आत्मा, परमात्मा, कर्मफल एवं परमार्थ के उन आधारों को डगमगा दिया जिन पर नैतिकता, सदाचरण एवं उदारता अवलम्बित थी ।। धर्म और अध्यात्म की अप्रामाणिकता एवं अनुपयोगिता विज्ञान ने प्रतिपादित की ।। इससे प्रभावित प्रबुद्ध वर्ग ओछी स्वार्थपरता पर उतर आया ।। आज संसार का धार्मिक, सामाजिक एवं राजनैतिक नेतृत्व जिनके हाथ में है उन अधिकांश व्यक्तियों आदर्श संकीर्ण स्वार्थों तक सीमित हैं ।। विश्व कल्याण को दृष्टि में रखकर उदार व्यवहार करने का साहस उनमें रहा नहीं, भले ही वे बढ़- चढ़कर बात उस तरह की करें ।। ऊँचे और उदार व्यक्तित्व यदि प्रबुद्ध वर्ग में से नहीं निकलते और उस क्षेत्र में संकीर्ण स्वार्थपरता व्याप्त हो जाती है, तो उससे नीचे वर्ग, कम पढ़े और पिछड़े लोग अनायास ही प्रभावित होते हैं ।। संसार में कथन की नहीं, क्रिया की प्रामाणिकता है ।। बड़े कहे जाने वाले जो करते हैं, जो सोचते हैं, वह विचारणा एवं कार्य पद्धति छोटे लोगों के विचारों में, व्यवहार में आती है ।।

इन दिनों कुछ ऐसा ही हुआ है कि आध्यात्मिक आस्थाओं से विरत होकर मनुष्य संकीर्ण- स्वार्थों की कीचड़ में फँस पड़ा है ।। बाहर से कोई आदर्शवाद की बात भले कहता दीखे, भीतर से उसका क्रिया- कलाप बहुत ओछा है ।। एक दूसरे में यह प्रवृत्ति छूत की बीमारी की तरह बढ़ी और अनाचार का बोलबाला हुआ ।। परिणाम सामने हे रोग, शोक, कलह, क्लेश, पाप, अपराध, शोषण, अपहरण, छल, प्रपंच की गतिविधियाँ बढ़ रही हैं और इन परिस्थितियों को बदलने एवं सुधारने की आवश्यकता है ।। मानवता को प्यार करने वाले हर सजग एवं विवेकवान् व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह समय की समस्याओं को समझे और व्यक्ति एवं समाज को अवनति से रोक, प्रगति के लिए जो संभव हो सके, वह करे ।। विचार क्रान्ति अभियान एवं युग निर्माण योजना सजग आत्माओं की एक ऐसी ही क्रमबद्ध विचारणा तथा कार्य पद्धति है जिसके आधार पर वर्तमान शोक- संताप भरी परिस्थितियाँ बदला जाना संभव है ।।

ट्रस्ट के उद्देश्य

  1. समस्त प्रकार के धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन |
  2. सनातन धर्म का प्रसार करना |
  3. गौ पालन एवं गौपालन से होने वाले लाभ को बताना |
  4. पशु पालन ढुग्ध उत्पादन पर विशेष बल लेना |
  5. लोक कल्याण एवं विश्व शांति के लिए समय समय पर विश्व धर्म गुरुओ द्वारा कथा ज्ञान एवं यज्ञ अनुष्ठान का आयोजन करना |
  6. मंदिर भवन का निर्माण कराना एवं पुराने मंदिरो का जीर्डोद्वार कराना |
  7. गरीब असहाय एवं पथिकों के रात्रि विश्राम एवं ठहरने हेतु निःशुल्क धर्मशाला भवन का निर्माण कराना , गरीब असहाय परिवार की कन्याओ का सामूहिक विवाह संपन कराना |
  8. समाज के गरीब असहाय एवं वृद्ध वर्ग के महिला पुरुषो के लिए निःशुल्क रोजगार परक शिक्षा एवं जीवन निर्वाहन हेतु भवन आश्रम की व्यवस्था करना |
  9. केंद्र सरकार व राज्य सरकार द्वारा मान्य व्यसायिक पूरक शिक्षा तकनीकी शिक्षा की व्यवस्था करना तथा शिक्षण प्रशिछण की व्यवस्था कराना |
  10. भारतीय संस्कृत भाषा दर्शन साहित्य कला एवं संगीत तथा अन्य प्राच्य विधायों आयुर्विज्ञान के संवर्ध एवं विकास मे सार्थक भूमिका हेतु समय गोष्ठितों एवं मालाशोध |
  11. तकनीकी शिक्षा हेतु इंजीन्यरिंग, आई.टी आइ, पोलिटेकनिक, मेडिकल कॉलेज के स्थापना एवं सफल संचालन करना |
  12. लोगो को आतंनिर्भर बनाने हेतु एलेक्ट्रोनिक/ कला प्रशिछण कराना |
  13. नारी शिक्षा पर बल देना एवं मादक द्र्वयों के रोकथम के लिए कार्यक्रम चलाना |
  14. मानव समाज के उत्थान एवं हितों के लिए हर सार्थक प्रयास कराना |
  15. यह है की खेल कूद को बड़ाने हेतु समय समय पर आयोजन कराना |